पब्लिक स्वर,धमतरी। आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर धमतरी के ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर में बुधवार को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का महास्नान महोत्सव पूरे विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान मंदिर परिसर "जय जगन्नाथ" के जयघोष से गूंज उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पवित्र जल और पंचामृत से अभिषेक में सहभागिता निभाई।
महास्नान के दौरान भगवान का पवित्र जल, पंचामृत, चंदन और सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने स्वयं अपने हाथों से भगवान को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान का महास्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
महास्नान के बाद शुरू होगा "अनसर" काल
श्री जगन्नाथ मंदिर के पुजारी बालकृष्ण शर्मा ने बताया कि परंपरा के अनुसार महास्नान के बाद भगवान कुछ दिनों के लिए अस्वस्थ हो जाते हैं। इस अवधि को "अनसर" (अनवसर) कहा जाता है। इस दौरान भगवान सार्वजनिक दर्शन नहीं देते और उन्हें औषधीय काढ़े का भोग लगाया जाता है। 11 जुलाई से 14 जुलाई तक प्रतिदिन सुबह 7:30 बजे श्रद्धालुओं को इसी दिव्य औषधि "काढ़ा" का प्रसाद वितरित किया जाएगा।
15 जुलाई को स्वस्थ होंगे भगवान, 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा
पुजारी बालकृष्ण शर्मा के अनुसार 15 जुलाई को भगवान स्वस्थ होकर पुनः जगमोहन में विराजमान होंगे। इसके अगले दिन 16 जुलाई को सुबह मंगला आरती के बाद भगवान को 56 भोग अर्पित किया जाएगा। दोपहर 2 से 3 बजे के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकलेगी, जो शाम लगभग 6 बजे गौशाला परिसर पहुंचकर संपन्न होगी। रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
पुरी से लाए गए पवित्र समुद्री जल से हुआ अभिषेक
पुजारी ने बताया कि महास्नान के लिए विशेष रूप से जगन्नाथ पुरी के समुद्र का जल लाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक सभी पवित्र नदियों का दिव्य स्वरूप इस जल में समाहित रहता है। इसी पवित्र जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है और इसकी पवित्रता एवं आध्यात्मिक प्रभाव पांच दिनों तक माना जाता है।
धमतरी में मिलता है पुरी जैसा आध्यात्मिक अनुभव
महास्नान महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि धमतरी में भगवान जगन्नाथ का यह आयोजन उनके लिए आस्था और सौभाग्य का प्रतीक है। वर्षों से इस परंपरा का हिस्सा बन रहे भक्तों का मानना है कि जो श्रद्धालु किसी कारणवश जगन्नाथ पुरी नहीं जा पाते, उन्हें धमतरी में भगवान के महास्नान और दर्शन का वही आध्यात्मिक सुख एवं पुण्य प्राप्त होता है।

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