अभनपुर post authorUser 1 30 March 2026

अभनपुर में अर्जुन वृक्षों का नरसंहार: शाम ढलते ही शुरू होता है “लकड़ी माफिया” का खेल, वन विभाग मौन!



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पब्लिक स्वर,अभनपुर/रायपुर। रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र में संरक्षित अर्जुन वृक्षों की अवैध कटाई अब भयावह रूप ले चुकी है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इसे केवल अवैध कटाई कहना कम होगा—यह सीधे-सीधे पर्यावरण का संगठित “नरसंहार” है, जो हर दिन खुलेआम हो रहा है और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदकर बैठा है।

स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही सूरज ढलने लगता है अर्जुन लकड़ी से लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही तेज हो जाती है। वही बताया जाता है कि धमतरी जिले की ओर से एक लाल रंग के ट्रैक्टर रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र के सातपारा, गोटियारडीह, चंडी रोड होते हुए अंधेरे का फायदा उठाकर बिना किसी रोक-टोक के आमनेर, खोरपा, अभनपुर और चंडी रोड स्थित आरामीलों (सॉ मिल) तक पहुंचते हैं जिसके बाद आरामीलों में इन अवैध लकड़ी को आसानी से खपाया जा रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल की जानकारी वन विभाग को भी है। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। आरोप हैं कि कमीशनखोरी के चलते जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखों पर “काली पट्टी” बांधकर बैठे हैं। यदि यह सच है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि एक संगठित भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है, जिसमें जंगलों की सुरक्षा के जिम्मेदारी उठाने वाले ही उसे नष्ट करने में सहभागी बन गए हैं।

बहरहाल अभनपुर क्षेत्र में अर्जुन जैसे महत्वपूर्ण और संरक्षित वृक्षों की लगातार कटाई न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि भविष्य में जलस्तर, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी गंभीर प्रभाव डालेगी। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है—क्या वन विभाग किसी बड़े दबाव में है? या फिर यह पूरा खेल “सिस्टम” के संरक्षण में चल रहा है?
पब्लिक स्वर की टीम जल्द ही इस मामले में बड़ा खुलासा करेगी। 

सूत्रों के अनुसार, अभनपुर क्षेत्र में केवल आमनेर और चंडी रोड ही नहीं, बल्कि अन्य स्थानों पर भी अवैध आरामीलों का जाल फैला हुआ है। वहीं “पब्लिक स्वर” की टीम इन सभी स्थानों की जमीनी जांच कर रही है और जल्द ही एक बड़े खुलासे के साथ सामने आएगी, जो इस पूरे अवैध नेटवर्क को बेनकाब कर सकता है।

अब सवाल यह है कि— कब जागेगा वन विभाग?
कब रुकेगा अर्जुन वृक्षों का यह नरसंहार?
और कब तक चलता रहेगा यह “कमीशन का जंगलराज”?
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वह दिन दूर नहीं जब अभनपुर के जंगल केवल नक्शों में ही नजर आएंगे।



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