पब्लिक स्वर,धमतरी। शहर में रेलवे की बहुप्रतीक्षित बड़ी रेल लाइन परियोजना के लिए सोमवार को बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई में करीब 45 दुकान और मकानों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया। रेलवे की टीम रायपुर से पहुंची थी, जिसने जिला प्रशासन, नगर निगम, राजस्व विभाग और पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की। पूरे अभियान के दौरान चार बुलडोजर लगाए गए और चार अलग-अलग टीमें बनाकर अतिक्रमण हटाया गया।
कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए 100 से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद थे। प्रशासन के मुताबिक, यह जमीन रेलवे की है और लंबे समय से इस पर अतिक्रमण था, जिसे हटाना जरूरी था ताकि रेल परियोजना का काम समय पर शुरू और पूरा हो सके। अधिकारियों ने साफ किया कि बचे हुए अतिक्रमणों को भी जल्द हटाया जाएगा।
इस बीच कार्रवाई को लेकर राजनीति भी तेज हो गई। पूर्व महापौर विजय देवांगन ने आरोप लगाया कि ज्यादातर दुकानदार खुद ही दुकानें खाली कर चुके थे और प्रशासन को कुछ समय और देना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके भतीजे की दुकान को सबसे पहले तोड़कर उन्हें निशाना बनाया गया है, जबकि कोई भी कार्रवाई का विरोध नहीं कर रहा था। उन्होंने इसे “बुलडोजर राज” बताया।
वहीं, कांग्रेस विधायक ने भी प्रशासन पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि 11 लोगों के पास वैध दस्तावेज होने के बावजूद कार्रवाई की गई और हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका असर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
दूसरी ओर, निगम आयुक्त प्रिया गोयल ने सभी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमों के तहत की जा रही है और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि लगभग 20 से 25 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए पुरानी कृषि उपज मंडी में व्यवस्था की जा रही है।
रेलवे अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि कोर्ट के आदेश की अवहेलना जैसी कोई बात नहीं है और पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा ताकि रेल परियोजना में किसी तरह की बाधा न आए।

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