पब्लिक स्वर/ ओडिशा के रायगड़ा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। कल्याण सिंहपुर प्रखंड के कंजामयोजी गांव में एक प्रेमी जोड़े को समाज के ठेकेदारों ने तालिबानी सजा दी। दोनों को बैल की तरह हल में जोतकर खेत जुतवाया गया, फिर लाठियों से पीटकर गांव से बाहर निकाल दिया गया।
बताया जा रहा है कि युवक-युवती एक ही गोत्र के थे और उनके बीच प्रेम संबंध थे, जिसे आदिवासी परंपराओं के विरुद्ध माना गया। परंपरा के अनुसार, एक ही गोत्र के युवक-युवती को भाई-बहन माना जाता है, इसलिए ग्रामीणों ने इस प्रेम को सामाजिक अपराध माना और खुलेआम "सजा" देने का फैसला लिया।
सूत्रों के अनुसार, गांव वालों ने पहले देवी की पूजा की, फिर प्रेमी जोड़े को खेत में बैल की तरह हल में जोत दिया। इसके बाद दोनों को लाठियों से पीटा गया और गांव से बेदखल कर दिया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे यह मामला पूरे राज्य में सुर्खियों में आ गया है।
पुलिस कर रही जांच
थाना प्रभारी नीलकंठ बेहरा ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस गांव पहुंची है। पीड़ित जोड़े की तलाश की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक प्रताड़ना का अमानवीय चेहरा
इस घटना ने एक बार फिर समाज में व्याप्त रूढ़िवादी सोच और हिंसक परंपराओं को उजागर किया है। 21वीं सदी के भारत में इस तरह की घटनाएं न सिर्फ कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि मानवाधिकारों का सीधा अपमान भी हैं।
समाज को बदलनी होगी सोच
आज के डिजिटल युग में जब देश तरक्की की बात कर रहा है, तब ऐसे अमानवीय व्यवहार का कोई स्थान नहीं हो सकता। यदि कोई प्रेम संबंध समाज की परंपरा से मेल नहीं खाता, तो उसे संवाद और समझाइश से सुलझाया जाना चाहिए, न कि हिंसा और प्रताड़ना से।
निष्कर्ष
प्रेमी जोड़े के साथ हुई यह बर्बरता निंदनीय है। यह घटना कानून व्यवस्था और सामाजिक चेतना दोनों के लिए एक गंभीर प्रश्न है। प्रशासन को न सिर्फ आरोपियों को सजा देनी चाहिए, बल्कि इस प्रकार की सोच को खत्म करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी को ऐसी प्रताड़ना का शिकार न होना पड़े।
> "प्रेम अपराध नहीं है, और न्याय का हक सिर्फ संविधान को है, समाज को नहीं।"

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